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सप्तधारा जलप्रपात

बस्तर के सघन वनों के बीच बाणासुर की राजधानी पुरात्विक नगरी बारसूर से 7 की.मी की दूरी पर बस्तर की जीवनदायनी माँ इंद्रावती सात धाराओ में ( कपिल धारा, शिव धारा, शिवर्चन धारा पांडव धारा,कृष्ण धारा, बाण धारा,एवं बोध धारा )में बट कर  बोधघाट की पहाड़ियों से नीचे गिरकर एक मनोरम दृश्य बनाती है। यह अत्यंत रमणीय है जब चट्टानों के बीच से नदी कई धाराओं में बट कर भीर से नीचे गिर एक ही धारा में बहती है।

सप्तधार जलप्रपात

©️हर्ष लाहोटी
कोण्डागांव

लिंगो धरा जलप्रपात

बस्तर क्षेत्र अपने अपुर्व सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है इस के कल कल करते नदी नाले पहाड़ियों से गिर कर झरने का निर्माण करते है। कुछ झरने विश्व प्रसिद्ध है जैसे चित्रकोट तीरथगढ़ पर अभी भी कुछ जलप्रपात अपनी पहचान को तरस रहे है। संदर्भित चित्र बस्तर के प्रवेश द्वार केशकाल से सटे ग्राम बटराली से कुँएमरी के रास्ते मे महज 17 की.मि दूर ग्राम बम्हनीमारी में अवस्थित है। यह एक बरसाती झरना है। ग्रामीणों की माने तो यह झरना दैवीय महत्व का है। इसमे ग्राम के आराध्य देवताओ का वास है। 
              नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण इस झरने का नाम लिंगोधरा है

सप्तधारा जलप्रपात

बस्तर के सघन वनों के बीच बाणासुर की राजधानी पुरात्विक नगरी बारसूर से 7 की.मी की दूरी पर बस्तर की जीवनदायनी माँ इंद्रावती सात धाराओ में ( कपि...